डिमेंशिया को कैसे ठीक किया जा सकता है?HealthPlanet

Posted on Fri 23rd Dec 2022 : 15:24

योग से डिमेंशिया रोग का इलाज

डिमेंशिया एक भयानक रोग है इसे अनदेखा न करें। डिमेंशिया का अर्थ होता है स्मृतियों का क्षय हो जाना अर्थात याददाश्त का खो जाना। यदि आप बार-बार और छोटी-छोटी बातें भी जल्दी से भुल जाते हैं और किसी बात को याद करने में दिमाग पर बहुत जोर डालना होता है तो आप डिमेंशिया से ग्रस्त हैं। यह रोग तब गंभीर माना जाता है जबकि आपकी याददाश्त बिल्कुल ही खत्म हो गई हो।

क्या है डिमेंशिया : डिमेंशिया मस्तिष्क की वह स्थिति है जिसमें किसी भी व्यक्ति के लिए कुछ भी याद रखना, समझ सकना, संप्रेषित कर सकना, सब कुछ बहुत मुश्किल हो जाता है। कुछ समय के बाद हालत यह हो जाते हैं कि व्यक्ति अपनी सुध-बुध लेने में ही असमर्थ हो जाता है। व्यक्ति का व्यक्तित्व ही बदल जाता है।

डिमेंशिया के लक्षण : भूलने के बाद जल्दी से याद आ जाए तो आप इस रोग से पीड़ित नहीं है, लेकिन फिर कभी याद ही नहीं आए तो आपको यह रोग हो सकता है। लेकिन यदि अभी-अभी घटी घटना या कोई बात आप तुरंत ही भूल जाते हैं तो यह रोग का प्रारंभिक लक्षण है। जैसे कि यदि आपने अभी खाना खाया है और आप भूल गए हैं कि खाना खाया यह नहीं या आपने खाना बनाया है और उसे परोसना भूल गए या खाना भूल गए।

इस तरह व्यक्ति सामान्य शब्द ज्ञान भी खोता जाता है। ऐसे व्यक्ति को समय और स्थान का ज्ञान भी नहीं रहता। डिमेंशिया से पीडि़त व्यक्ति अपनी ही सड़क पर रास्ता भूल सकता है। वह यह भी भूल सकता है कि कब, कहां कैसे पहुंचा तथा घर वापिस कैसे पहुंचे।

इसके अलावा इस रोग से ग्रस्त व्यक्ति कभी किसी भी विषय में निर्णन नहीं ले सकता। आत्मविश्वास खत्म हो जाता है। वह किसी भी चीज को इधर-उधर रख देता है। इस रोग से ग्रस्त व्यक्ति की मनोदशा कभी एक जैसी नहीं रहती।

डिमेंशिया का कारण : डिमेंशिया के दो कारण है पहला- मस्तिष्क की कोशिकाओं का नष्ट हो जाना और दूसरा उम्र के साथ मस्तिष्क की कोशिकाओं का कमजोर होना। सिर की चोट या किसी गंभीर रोग जैसे ब्रेन ट्यूमर, अल्जीमर आदि से कोशिकाएं नष्ट हो सकती है। दूसरा लगातार तनाव और अवसाद में रहने से यह कोशिकाएं कमजोर हो जाती है और तीसरा उम्र का असर।

आजकल एक चौथा कारण भी देखने में आया है कि गलत खानपान और प्रदूषण के कारण भी यह रोग बढ़ रहा है। शहरों में डिमेंशिया बहुत ही तेजी से ज्यादातर उम्रदराज लोगों के बीच फैल रहा है। पहले यह रोग 70 साल की उम्र के बाद देखने में आता था, लेकिन अब 40 वर्ष के बाद। कई ऐसे लोग हैं जो इस बिमारी को गंभीरता से लेने की बजाय उम्र के साथ बढ़ते लक्षणों में शामिल कर लेते हैं।

योग से समाधान : 1.आहार और विहार, 2. प्राणायाम और ध्यान, 3.सूर्य नमस्कार और 4.जातिस्मरण का प्रयोग।

आहार और विहार : आहार को बदलना जरूरी है। ऐसा भोजन करें जो आपने दिमाग के लिए पोषक हो। सलाद और फलों का इस्तेमाल ज्यादा करें। इसके अलावा भ्रमण करना या पैदल चलने को ज्यदा महत्व दें।

प्राणायाम और ध्यान : प्राणायाम आपके मस्तिष्क के लिए सर्वश्रेष्ठ दवा है। सिद्धासन में बैठकर प्रतिदिन सुबह और शाम 10 मिनट तक अनुलोम-विलोम करें और उसके बाद 10 मिनट तक ध्यान करें। इसे लगातार बगैर नागा किए तीन माह तक तक करते रहें।

सूर्य नमस्कार : सूर्य नमस्कार में लगभग प्रमुख आसनों का समावेश हो जाता है और आपके शरीर को तंदुरुस्त बनाए रखने में सक्षम है।

जातिस्मरण का प्रयोग : रा‍त्रि को सोने से पूर्व दिनभर किए गए कार्य और घटना को उल्टेक्रम में याद करें। जैसे सोने से कुछ क्षण पूर्व आपने ‍क्या किया या क्या हुआ। उसके बाद क्या हुआ, फिर उसके बाद क्या हुआ। इस तरह सुबह तक के घटनाक्रम को उल्टेक्रम में याद करें। सिर्फ तीन माह और आप बन जाएंगे स्मृतिवान व्यक्ति।

विशेष : प्रतिदिन मस्तिष्क को सक्रिय बनाएं रखने के लिए किसी न किसी रचनात्मक कार्य में स्वयं को व्यवस्त रखें। इसके अलावा किसी योग्य चिकित्सक की सलाह लें।

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